आँखिन देखी

आँखें तो देख ही लेती हैं औपचारिकता में छुपी हिंसा को, बेरुखी का हल्का से हल्का रंग पकड़ लेती है आँख फिर भी बैठे रहना पड़ता है खिसियानी मुस्की लिए, छल-कपट ईर्ष्या

More

मन लाग्यो मेरो यार

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥ जो सुख पाऊँ राम भजन में सो सुख नाहिं अमीरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥ भला बुरा सब का सुनलीजै कर गुजरान गरीबी में

More

अछूत की शिकायत

/

हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी हमनी के साहेब से मिनती सुनाइबि। हमनी के दुख भगवानओं न देखता ते, हमनी के कबले कलेसवा उठाइबि। पदरी सहेब के कचहरी में जाइबिजां, बेधरम

More

डायरी लिखना

डायरी लिखना एक कवि के लिए सबसे मुश्किल काम है। कवि जब भी अपने समय के बारे में डायरी लिखना शुरू करता है अरबी कवि समीह-अल-कासिम की तरह लिखने लगता है कि

More

इस स्त्री से डरो

यह स्त्री सब कुछ जानती है पिंजरे के बारे में जाल के बारे में यंत्रणागृहों के बारे में। उससे पूछो पिंजरे के बारे में पूछो वह बताती है नीले अनन्त विस्तार में

More

इस बहरे वक़्त में

खेलते हुए अन्य बच्चों के साथ अपने साथ हो रहे खेड़ी का विरोध कर रहा है मेरा बेटा चिल्ला-चिल्लाकर काफ़ी कर्कश लग रही है आवाज़ उसकी बार-बार जाने को होता हूँ तैयार

More

रेख़्ते में कविता

जैसे कोई हुनरमंद आज भी घोड़े की नाल बनाता दिख जाता है ऊँट की खाल की मशक में जैसे कोई भिश्‍ती आज भी पिलाता है जामा मस्जिद और चांदनी चौक में प्‍यासों

More

हीर सुफ़ियां

हीर सुफ़ियां है एक सुन्दर लड़की हीर सुफ़ियां के हैं उनतीस दांत हीर सुफ़ियां मुस्काती है तो लाल किले की लाल दीवार और सुर्ख़ हो जाती है चांदनी चौक में रहती है

More

संघर्ष साझे नहीं होते

जीवन के संघर्ष साझा नहीं होते साझा होती है सहानुभूतियाँ साझा होती हैं प्रार्थनाएँ साझा होते हैं स्नेह आलिंगन साझा होती है आँसू पोंछने वाली हथेलियाँ साझा होती है हाथों की फँसी

More
1 14 15 16 17 18 35