मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
तुमसे अलग होकर लगता है अचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं, और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में गिरता जा रहा हूँ। अब कहीं कोई यात्रा नहीं है, न अर्थमय, न
Moreमुझको तब भी यह लगता था कविता ही दुख की बोली है काग़ज़ की नावों के जैसे यद्यपि छोटे-छोटे सुख थे, दुख का भवसागर अपार था लेकिन थी एक जगह घर में
Moreचेतना पारीक कैसी हो ? पहले जैसी हो ? कुछ-कुछ खुश कुछ-कुछ उदास कभी देखती तारे कभी देखती घास चेतना पारीक, कैसी दिखती हो ? अब भी कविता लिखती हो ? तुम्हें मेरी याद न होगी
Moreवे कहते हैं : प्रेम-कविताएँ लिखने के लिए प्रेम-कविताएँ पढ़ो वे यह नहीं कहते : प्रेम करो वे कहते हैं : फूलों तक जाने के लिए ख़ुशबू और रंग ख़रीदो वे यह
Moreमैं एक समस्या हूँ मुझे हल कीजिए उड़ने की चाह हूँ भटक गई राह हूँ निकल गई आह हूँ हिम्मत की थाह हूँ दुखती हुई रग हूँ थका हुआ पग हूँ ठहर
Moreजो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है जो रवि के रथ का घोड़ा है वह
Moreघाटे का सौदा दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और बयालीस रुपए देकर उसे ख़रीद लिया. रात गुज़ार कर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा,‘‘तुम्हारा नाम क्या
Moreसबसे अधिक हत्याएँ समन्वयवादियों ने की दार्शनिकों ने सबसे अधिक ज़ेवर खरीदा भीड़ ने कल बहुत पीटा उस आदमी को जिस का मुख ईसा से मिलता था वह कोई और महीना था
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