हम समय की नदी तैर कर आ गए अब खड़े हैं जहाँ वह जगह कौन है? तोड़ते-जोड़ते हर नियम, उपनियम उत्सवों के जिए साँस-दर-साँस हम एक पूरी सदी तैर कर आ गए
हम समय की नदी तैर कर आ गए अब खड़े हैं जहाँ वह जगह कौन है? तोड़ते-जोड़ते हर नियम, उपनियम उत्सवों के जिए साँस-दर-साँस हम एक पूरी सदी तैर कर आ गए
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