विनोदिनी

मैंने कभी नहीं सोचा था सुबह तक ख़त्म हो जाऊँगा मैं और एक जंगल सी समादृत रहोगी तुम मेरे हृदय के किसी गहरे एकांत में सदा तुम कभी नहीं समझोगी तुम्हारे होने

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