जाने से पहले अपने वक्ष पर स्थान दो देव!

प्रेम का ज्वार सूख रहा है अंदर इस गोलार्ध पर प्रेम गोमेद रत्न हैयाकि गोपनीय उल्लास का कोई द्वार जिससे होकर प्रेम गोश फ़रमाता है चित-पट जिस करवट भी बैठो प्रेम आ

More