ख़ामोश चिंताएँ

आठ बज गए। दूधवाले का अभी तक कोई अतापता नहीं था। पानी धुंआधार बरस रहा था। बादल जैसे आज ही गरज-बरस कर साल भर का कोटा पूरा करने पर आमादा थे। माया

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