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किनारा

ग़ज़ल

हम जी रहे हैं जान! तुम्हारे बग़ैर भी

हम जी रहे हैं जान! तुम्हारे बग़ैर भी हर दिन गुज़र रहा है गुज़ारे बग़ैर भी सबके लिए किनारे पे होता नहीं कोई कुछ लोग डूबते हैं पुकारे बग़ैर भी जीते बग़ैर

हम जी रहे हैं जान! तुम्हारे बग़ैर भी

ग़ज़ल

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