नहीं लिखा होगा कहीं कि धीरे-धीरे बदल गए पैरों के निशान पगडंडियों में पगडंडियाँ बदल गई रास्तों में और एक दिन रास्ते बदल गए किसी अबूझ पहेली में नहीं लिखा होगा कि
दुनिया से मेरे जाने की बात सामने आ रही है ठंडी सादगी से यह सब इसलिए कि शरीर मेरा थोड़ा हिल गया है मैं तैयार तो क़तई नहीं हूँ अभी मेरी उम्र
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