मुझे बचपन से नक़्शे देखने का शौक़ है। आप समझेंगे कि कुछ भूगोल विज्ञान की तरफ़ प्रवृत्ति होगी – नहीं, सो बात नहीं; असल बात यह है कि नक्शों के सहारे दूर-दुनिया
हरी बिछली घास। दोलती कलगी छरहरे बाजरे की। अगर मैं तुम को ललाती साँझ के नभ की अकेली तारिका अब नहीं कहता, या शरद के भोर की नीहार – न्हायी कुँई, टटकी
Moreमुझे बचपन से नक़्शे देखने का शौक़ है। आप समझेंगे कि कुछ भूगोल विज्ञान की तरफ़ प्रवृत्ति होगी – नहीं, सो बात नहीं; असल बात यह है कि नक्शों के सहारे दूर-दुनिया
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