• Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • मुखपृष्ठ
  • परिचय
  • संपादकीय
  • विधाएँ
    • कहानी
    • कविता
    • ग़ज़ल
    • नज़्म
    • व्यंग्य
    • पत्र
    • नाटक
    • निबंध
    • आलोचना
    • समीक्षा
    • संस्मरण
    • विमर्श
    • यात्रा वृत्तांत
    • जीवनी
    • आत्मकथा
    • अनुवाद
    • डायरी
    • सिनेमा
    • साक्षात्कार
    • लोक साहित्य
    • विश्व साहित्य
  • नये रचनाकार
  • वर्कशॉप
  • ऑडियो/वीडियो
  • संपर्क

Mobile Logo

अजय 'दुर्जेय' की कविताएँ |

अजय 'दुर्जेय' की कविताएँ |
कविता

अजय ‘दुर्जेय’ की कविताएँ

1. रोने के तमाम हृदय-विदारक कारणों से इतर क्या तुमने कभी सोचा है कि न रो पाना भी रोने का एक कारण हो सकता है? 2. समुद्र को चुल्लू में रखकर पी

अजय 'दुर्जेय' की कविताएँ |

अजय ‘दुर्जेय’ की कविताएँ

कविता

1. रोने के तमाम हृदय-विदारक कारणों से इतर क्या तुमने कभी सोचा है कि न रो पाना भी रोने का एक कारण हो सकता है? 2. समुद्र को चुल्लू में रखकर पी

More

लोकप्रिय

मेरे मन का ख़याल

मेरे मन का ख़याल

कितना ख़याल रखा है मैंने अपनी देह का सजती-सँवरती हूँ

tab bhi pyar kiya

तब भी प्यार किया

मेरे बालों में रूसियाँ थीं तब भी उसने मुझे प्यार

rupesh chaurasiya

हमारी रीढ़ मुड़ चुकी है

हमारी रीढ़ मुड़ चुकी है “मैं” के बोझ से खड़े

Salman Rushdie

रुश्दी के नाम ख़त

यह पहली दफ़ा नहीं है कि जब किसी ‘सलमान‘ ने

Sedition Law In India

भारत में राजद्रोह कानून की ज़रूरत; कितनी सही-कितनी ग़लत?

1949 में जब भारत ने अपना संविधान अपनाया और 1950

  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram

© 2020 - सर्वाधिकार सुरक्षित। डिजाइन और विकसित v2sk Techno Private Limited द्वारा

  • परिचय
  • संपर्क
  • प्राइवेसी पॉलिसी

ईमेल:- contact@ummeedein.com
editor@ummeedein.com

  • मुखपृष्ठ
  • परिचय
  • संपादकीय
  • विधाएँ
    • कहानी
    • कविता
    • ग़ज़ल
    • नज़्म
    • व्यंग्य
    • पत्र
    • नाटक
    • निबंध
    • आलोचना
    • समीक्षा
    • संस्मरण
    • विमर्श
    • यात्रा वृत्तांत
    • जीवनी
    • आत्मकथा
    • अनुवाद
    • डायरी
    • सिनेमा
    • साक्षात्कार
    • लोक साहित्य
    • विश्व साहित्य
  • नये रचनाकार
  • वर्कशॉप
  • ऑडियो/वीडियो
  • संपर्क
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram