मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
बाबा! मुझे उतनी दूर मत ब्याहना जहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिर घर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हें मत ब्याहना उस देश में जहाँ आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते हों जंगल नदी पहाड़
Moreपिता की छोटी-छोटी बहुत-सी तस्वीरें पूरे घर में बिखरी हैं उनकी आँखों में कोई पारदर्शी चीज़ साफ़ चमकती है वह अच्छाई है या साहस तस्वीर में पिता खाँसते नहीं व्याकुल नहीं होते
Moreजो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएँगे कठघरे में खड़े कर दिये जाएँगे जो विरोध में बोलेंगे जो सच-सच बोलेंगे, मारे जाएँगे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि किसी की कमीज
More“शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो अक्षरों के बीच गिरे हुए आदमी को पढ़ो क्या तुमने सुना की यह लोहे की आवाज है या मिट्टी में गिरे हुए खून का
Moreइह मेरा गीत किसे ना गाणा इह मेरा गीत मैं आपे गा के भलके ही मर जाणा इह मेरा गीत किसे ना गाना । इह मेरा गीत धरत तों मैला सूरज जेड
Moreइन दिनों जब समय इतना धीमा है कि चीते की चाल घोंघे की मालूम हो मैं हमारे बीच उन चंद पलों की तेजी को अपनी सबसे ज्यादा तेज गति साबित करना चाहता
Moreएक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है मैं पूछता
Moreचैन की बाँसुरी बजाइये आप शहर जलता है और गाइये आप हैं तटस्थ या कि आप नीरो हैं असली सूरत ज़रा दिखाइये आप
Moreमैं वह ऊँचा नहीं जो मात्र ऊँचाई पर होता है कवि हूँ और पतन के अंतिम बिंदु तक पीछा करता हूँ हर ऊँचाई पर दबी दिखती है मुझे ऊँचाई की पूँछ लगता
More