एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए आगाज़े-आशिक़ी का मज़ा आप
एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए आगाज़े-आशिक़ी का मज़ा आप
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सर-ए-मिंबर है किस के है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया
इश्क़ में जाँ से गुज़रते हैं गुज़रने वाले मौत की राह नहीं देखते मरने वाले आख़िरी वक़्त भी पूरा न किया वादा-ए-वस्ल आप आते
ज़िस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें। सतही जज्बे को मुनासिब नहीं है प्यार कहें॥ बारहा फ़र्द की अज़मत ने जिसे मोड़