न जाने हुई बात क्या

न जाने हुई बात क्या मन इधर कुछ बदल-सा गया है मुझे अब बहुत पूछने तुम लगी हो उधर नींद थी इन दिनों तुम जगी हो यही बात होगी अगर कुछ न

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सोलह आने

कमलनारायण ने आग्रहपूर्वक कहा कि आज तुम भी यहीं खाओ। वरुण है, बना लेगा। — अच्छा। मैंने स्वीकार कर लिया। दुमंज़िले की ओर देखकर कमलनारायण चिल्लाया। — वरुण, ओ वरुण! – आया।

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