(ये कविताएँ पहाड़ के दूर दराज क्षेत्रों के ऐसे लोकगीतों से प्रेरित हैं जिन्हें लोक कविताएँ कहना ज्यादा सही होगा पर ये उनके अनुवाद नहीं हैं।) 1. तुम्हें कहीं खोजना असंभव था
जागते हुए मैं जिनसे दूर भागता रहता हूँ वे अक्सर मेरी नीन्द में प्रवेश करते हैं एक दुर्गम पहाड़ पर चढ़ने से बचता हूँ लेकिन वह मेरे सपने में प्रकट होता है
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