(एक ख़त जॉन एलिया का अनवर मक़सूद के नाम) अन्नो जानी ! तुम्हारा ख़त मिला। पाकिस्तान के हालात पढ़ कर कोई ख़ास परेशानी नहीं हुई। यहां भी इसी क़िस्म के हालात चल
(एक ख़त जॉन एलिया का अनवर मक़सूद के नाम) अन्नो जानी ! तुम्हारा ख़त मिला। पाकिस्तान के हालात पढ़ कर कोई ख़ास परेशानी नहीं हुई। यहां भी इसी क़िस्म के हालात चल
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