गुज़र गए कई मौसम कई रुतें बदलीं उदास तुम भी हो यारो उदास हम भी हैं फ़क़त तुम्हीं को नहीं रंज-ए-चाक-दामानी कि सच कहें तो दरीदा-लिबास हम भी हैं तुम्हारे बाम की
गुज़र गए कई मौसम कई रुतें बदलीं उदास तुम भी हो यारो उदास हम भी हैं फ़क़त तुम्हीं को नहीं रंज-ए-चाक-दामानी कि सच कहें तो दरीदा-लिबास हम भी हैं तुम्हारे बाम की
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