इंतज़ार

एक औरत ताउम्र बाट जोहती है कि उसे किसी नाम से पुकारा जाए ऐसे कि नाम के आगे पीछे उग आएँ कई सारे नाम और वह अपना एक नाम भूल जाए। एक

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कुछ सूचनाएँ

सबसे अधिक हत्याएँ समन्वयवादियों ने की दार्शनिकों ने सबसे अधिक ज़ेवर खरीदा भीड़ ने कल बहुत पीटा उस आदमी को जिस का मुख ईसा से मिलता था वह कोई और महीना था

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उस स्त्री का प्रेम

वह स्त्री पता नहीं कहाँ होगी जिसने मुझसे कहा था — वे तमाम स्त्रियाँ जो कभी तुम्हें प्यार करेंगी मेरे भीतर से निकल कर आई होंगी और तुम जो प्रेम मुझसे करोगे

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अजीब बात

जगहें खत्म हो जाती हैं जब हमारी वहॉं जाने की इच्छाएँ ख़त्म हो जाती हैं लेकिन जिनकी इच्छाएँ ख़त्म हो जाती हैं वे ऐसी जगहों में बदल जाते हैं जहॉं कोई आना

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फ़ासिस्ट

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं तो उसने कहा कि वह मनुष्य है मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं तो उसने कहा कि वह जनप्रतिनिधि है मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं

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पहाड़ के हृदय जैसा मनुष्य का हृदय होना चाहिए

1. घर जितनी शास्त्रीय है यह बात उतनी ही लौकिक घर को जोड़ने वाला श्रम मनुष्य मात्र को ही नहीं पशु – पक्षी और जीवन को धारण किये कीड़े को भी कितना

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मैंने हारने के लिए

मैंने हारने के लिए यह लड़ाई शुरू नहीं की थी इन अभाव के दिनों में भी जितना खुश हुआ उतना पहले कभी नहीं कि इधर कर्ज़ में जीने की आदत मैंने कई

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न जी भर के देखा

न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की उजालों की परियाँ नहाने लगीं नदी गुनगुनाई ख़यालात की मैं चुप था तो चलती हवा रुक गई ज़बाँ

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फिर बसंत आना है

तूफ़ानी लहरें हों अम्बर के पहरे हों पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों सागर के माँझी मत मन को तू हारना जीवन के क्रम में जो खोया है, पाना है

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